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देखेंगे सच,दिखाएंगे सच

हाईकोर्ट की रोक के बावजूद अधिकारियों ने जारी कर दी एसओपी,फजीहत के बाद बदला फैसला…

हाईकोर्ट द्वारा चारधाम यात्रा रोके जाने के बाद तीरथ सरकार को बड़ा झटका लगा है।

 

राज्य कैबिनेट से आदेश पारित हुआ था लिहाजा इस नीतिगत फैसले पर रोक लगने के बाद सरकार सकते में आ गई। सरकार ने नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने के मूड तक बना लिया। सरकार के तेवर देख सचिवालय में बैठे अधिकारी भी जोश में आ गये।

और कोर्ट की रोक के बावजूद उन्होंने आनन-फानन में कल ही देर शाम 10 बजे चारधाम यात्रा को लेकर एसओपी जारी कर दी। चौतरफा किरकिरी के बाद आज सुबह सरकार को चारधाम यात्रा को लेकर संसोधित एसओपी जारी करनी पड़ी। जिसमें हाईकोर्ट का हवाला देकर सरकार ने बताया है फिलहाल यात्रा शुरू नहीं की जा सकती।

जबकि कैबिनेट मंत्री और शासकीय प्रवक्ता सुबोध उनियाल ने कहा है कि सरकार ने पूरी तैयारी के बाद ही स्थानीय लोगों को सीमित संख्या में चारधाम दर्शन की इजाजत दी थी। उन्होंने कोर्ट के आदेश पर आश्चर्य व्यक्त करते हुये कहा कि सरकार आदेश की लिखित काॅपी मिलने के बाद उसका परीक्षण कराएगी और जरूरत पड़ी तो सरकार नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक जाएगी। आपको बता दें कि राज्य सरकार ने 1 जुलाई से चारधाम यात्रा शुरू करने का फैसला लिया था। सरकार ने बकायदा चारधाम यात्रा के मामले को कैबिनेट के माध्यम से अप्रूवल दिया। जिसके तहत पहले चरण में गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के दर्शन किये जाने थे।

इसमें भी केवल उत्तरकाशी, चमोली और रूद्रप्रयाग जिले के स्थानीय निवासी ही चारधामों के दर्शन कर सकते थे। लेकिन नैनीताल हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुये राज्य कैबिनेट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने कोरोना संक्रमण को लेकर सरकार की तैयारियों पर सवाल खड़े किये हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार ने हरिद्वार कुंभ की कोरोना गाइडलाइन को ही काॅपी पेस्ट कर दिया है जोकि सही नहीं है।

कोर्ट ने कहा है कि पहले सरकार चारधाम यात्रा में कोरोना संक्रमण को लेकर फुलप्रूफ प्लान बताए। अब 7 जुलाई को इस मामले पर हाईकोर्ट सुनवाई करेगी और उसके बाद ही साफ हो पाएगा कि चारधामा यात्रा शुरू होगी या नहीं।

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